आर्ट, डिज़ाइन एण्ड सोसाइटी
सीहा भारत अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी
28 से 30 नवम्बर, 2018
     
 



 
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आर्ट, डिज़ाइन एण्ड सोसाइटी
 

कला और डिजाइन के बीच सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों के द्वारा समद्विभाजन की स्थिति बन गई, जो औद्योगिक क्रांति और उपनिवेशवाद का कारण बनी। इसने विरोधाभासी प्रतिमान को जन्म दिया, जिसमें अतीत के उपयोगितावादी रूपाकार विद्यमान हैं और उन्हें संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है।

भारत जैसे देश में,  कला संस्थान उपनिवेशवाद के उत्पाद हैं, जिसका उद्देश्य कला-सृजन, प्रचार-प्रसार और उपभोग की पारंपरिक संरचना के पतन के लिए अग्रणी पश्चिमी मूल्यों का निर्माण करना है। दुनिया भर में समाजों में कलात्मक उत्पादन के प्रमुख संग्रह का गठन करने वाली स्वदेशी,  लोकप्रिय और अनुष्ठान कला की जीवित परंपराओं ने भव्य कथाओं पर ध्यान नहीं दिया। इससे मूर्त और अमूर्त की एक विस्तृत श्रृंखला का बहिष्कार हो गया,  जो विश्वभर में अतीत की अपूर्ण धारणाओं को जन्म देती है।

इस संगोष्ठी का उद्देश्य उन छोटे/कथाकारों को एक साथ लाने का है जिनकी प्रायः अनदेखी की गई है परन्तु यह मानवता के टेपेस्ट्री के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यह भी अनिवार्य हो गया है कि हम कला और डिज़ाइन की धारणाओं की खोज पर विभिन्न प्रकार से विचार करते हुए रचनात्मक प्रक्रिया के सार और समाज के साथ चर्चा को प्रोत्साहित करते हैं। इस संगोष्ठी का उद्देश्य वर्गीकरण की भूमिका की जांच करना तथा कला और डिज़ाइन की कार्यप्रणाली की जांच का भी प्रयास करना है।

इस पृष्ठभूमि के अन्तर्गत,  संगोष्ठी में निम्नलिखित विषयों के तहत रिसर्च पेपर को आमंत्रित करना चाहेंगेः

    • पूर्व के डिजाइनः वर्तमान की कला
    • पवित्रता और धर्मनिरपेक्षता का समन्वय
    • कला और डिजाइनः समाज में संघर्ष और संश्लेषण की अभिव्यक्ति
    • निरर्थकता से उपयोगिता तक
    • स्थान, डिज़ाइन और कला
    • पराक्रम,  राजनीति एवं प्रचार
    • स्थिरता- अभ्यास और उत्पादन
    • दृष्टि,  धारणा और व्याख्या
    • कला और डिज़ाइन में संकेत और प्रतीकात्मकता
    • पूर्वधारणा  का निराकरण: अनकही कहानियां
    • मूर्त के माध्यम से अमूर्त की व्याख्या करना
    • समाज को प्रभावित करनाः सोशल और डिजिटल मीडिया
    • व्यक्तिगत और सामूहिक का अनुरूप
    • कला इतिहासः संधि स्थल

रिसर्च पेपर प्रस्तुति करने के लिए 20 मिनट का समय दिया जाएगा।

कृपया अपने प्रस्तावित पेपर का शीर्षक भेजें, जिसका ऐब्स्ट्रैक्ट 300 से 350 शब्दों का हो। कृपया अपने ईमेल के विषय में ‘ऐब्स्ट्रैक्ट ‘  शब्द लिखें तथा ईमेल cihaindia2018@gmail.com  पर अवश्य भेज दें।

ऐब्स्ट्रैक्ट आमंत्रण की द्वितीय अन्तिम तिथि: बुधवार, 30 मई,  2018

कृपया ध्यान दें कि संगोष्ठी में सहभागिता की पुष्टि केवल रजिस्ट्रेशन शुल्क प्राप्त होने पर ही की जाएगी

 

संयोजक:

प्रो. (डॉ.) अनूपा पाण्डे
प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, कला इतिहास विभाग
निदेशक एवं प्रो. कुलपति, राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान

(डॉ.) सविता कुमारी
सहायक प्रो., कला इतिहास विभाग
राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान

 
 
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  वेबसाइट डिवेलप : आई टी सैल, राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान के द्वारा    
  सामग्री प्रदान कर्ता, अद्यतन और रखरखाव कर्ता : राष्ट्रीय संग्रहालय संस्थान, कला इतिहास विभाग